Monday, April 11, 2011

आस पास हूँ


हाँ तेरे आस पास हूँ,

मैं आज फिर उदास हूँ ,!


छू भी ना पा सकूँ तुझे,

मुझको लगा मैं ख़ास हूँ,!!?


नज़रों में तेरी आ सकूँ,

अब मैं बस ये आस हूँ,!


यूँ तो ना बेख़बर रहो

ख़ामोश एक एहसास हूँ,!


तू खुदा हुवा तो क्या हुवा

तिरे इल्म की मैं प्यास हूँ!!

2 comments:

आशुतोष said...

यूँ तो ना बेख़बर रहो
ख़ामोश एक एहसास हूँ,!
.............
ख़ामोशी सबसे बड़ा एहसास है .व्यक्ति अगर ख़ामोशी समझने लगे तो जीवन की शून्यता ख़तम हो जाए..सारगर्भित पंक्तिया
..............
क्या वर्ण व्योस्था प्रासंगिक है ?? क्या हम आज भी उसे अनुसरित कर रहें हैं??

सुशील बाकलीवाल said...

शुभागमन...!
कामना है कि आप ब्लागलेखन के इस क्षेत्र में अधिकतम उंचाईयां हासिल कर सकें । अपने इस प्रयास में सफलता के लिये आप हिन्दी के दूसरे ब्लाग्स भी देखें और अच्छा लगने पर उन्हें फालो भी करें । आप जितने अधिक ब्लाग्स को फालो करेंगे आपके ब्लाग्स पर भी फालोअर्स की संख्या उसी अनुपात में बढ सकेगी । प्राथमिक तौर पर मैं आपको 'नजरिया' ब्लाग की लिंक नीचे दे रहा हूँ, किसी भी नये हिन्दीभाषी ब्लागर्स के लिये इस ब्लाग पर आपको जितनी अधिक व प्रमाणिक जानकारी इसके अब तक के लेखों में एक ही स्थान पर मिल सकती है उतनी अन्यत्र शायद नहीं । प्रमाण के लिये आप नीचे की लिंक पर मौजूद इस ब्लाग के दि. 18-2-2011 को प्रकाशित आलेख "नये ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव" का माउस क्लिक द्वारा चटका लगाकर अवलोकन अवश्य करें, इसपर अपनी टिप्पणीरुपी राय भी दें और आगे भी स्वयं के ब्लाग के लिये उपयोगी अन्य जानकारियों के लिये इसे फालो भी करें । आपको निश्चय ही अच्छे परिणाम मिलेंगे । पुनः शुभकामनाओं सहित...

नये ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव.

युवावय की चिंता - बालों का झडना ( धीमा गंजापन )

www.hamarivani.com