Tuesday, January 31, 2012

अंतिम प्रयास

भरता उल्लास,

तुम्हारा नाद ,

भीतर भीतर ,

नव उन्माद ,

जैसे आलौकिक

नव निर्माण,

तुम अरूप ,

किन्तु उजास ,

सर्वभूत ,

शुभ सुवास ,

मोक्ष की ,

प्राप्ति का ...

तुम मेरा

अंतिम प्रयास

ओ पूजनीय ,

परम आत्मा ...

तुम से मिलन....

अंतिम प्रयास

4 comments:

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत उम्दा

sushma 'आहुति' said...

अंतिम प्रयास ही तो शुरुवात है.....

dinesh aggarwal said...

बहुत ही खूबसूरत रचना.....
निश्चित ही सराहनीय
नेता,कुत्ता और वेश्या

Piush Trivedi said...

बढ़िया .../// इसे भी देखे :- http://hindi4tech.blogspot.com Follow If U Lyk My BLog////

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