Tuesday, February 5, 2013

समाधान

क्यूँ समाधान खोजने निकल पडता है
हर बार ..जीवन ,
क्या मार्ग पर बढ़ते रहना ही नहीं
केवल ध्येय,
क्या लक्ष्य
नहीं कर देता सीमित
मन विराट...
ब्रह्माण्ड सी सोच का
कर रहा जीवन चक्र, ध्येय ,लक्ष्य ...,
....आदर्श विलुप्त ?
... और फिर भी लक्ष्यहीन
भोगता रह जाता
समाधान की खोज भर में
.... आजीवन कारावास ...यह मन

2 comments:

Tushar Raj Rastogi said...

सुन्दर अभिव्यक्ति | आभार

Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

sushma 'आहुति' said...

बेहतरीन अभिव्यक्ति.....

www.hamarivani.com