Friday, March 30, 2012

हर क्षण .....जीवंत

विनम्र रहते हैं
विस्मित हो जब टूट कर
औन्धे मुंह ... धंसे रहते हैं
गर्म मिटटी में
तब भी
विनम्र रहते हैं स्वप्न .....
पुनः पूर्ण होने की अभिलाषा से॥
रहते हैं हर क्षण .....जीवंत

Monday, March 26, 2012

सूक्ष्म


कितना सूक्ष्म है
यह भेद
शाश्वत और निरंतर ...
हो जाने में
जटिल भी तो कितना
हर क्षण
जब हो
वायु जल आकाश अग्नि
और पृथ्वी से
परे हो जाने को व्याकुल
यह चित्त.......!!

Saturday, February 4, 2012

दोहे

मौसम आये जाए पर ,सब सहना चुपचाप

नारी जीवन वृक्ष सा ,व्यर्थ न कर संताप


कितने आंसू पी रहा , एक बेटी का बाप

मान रहा वो आज भी ,लड़की को अभिशाप


नहीं सरल रहना वहां ,हो निश्छल निष्पाप

सब लेकर जीते जहाँ ,अधम सोच की छाप


साधन पथ पर बढ़ चला ,फिर भी मन घबराए

जोत जले जो भक्ति की ,श्याम भी मिल जाए!


मैला इसको तू करे, धरा न कूड़ा दान

आश्रय सबको दे रही ,रखले थोडा मान

Tuesday, January 31, 2012

अंतिम प्रयास

भरता उल्लास,

तुम्हारा नाद ,

भीतर भीतर ,

नव उन्माद ,

जैसे आलौकिक

नव निर्माण,

तुम अरूप ,

किन्तु उजास ,

सर्वभूत ,

शुभ सुवास ,

मोक्ष की ,

प्राप्ति का ...

तुम मेरा

अंतिम प्रयास

ओ पूजनीय ,

परम आत्मा ...

तुम से मिलन....

अंतिम प्रयास

सवाल जवाब

आज कल ..अक्सर
कुछ सवाल जवाब
मेरे सिरहाने सोये रहते हैं
इस उम्मीद से कि मैं
इन्हें अपने दिल में कोई जगह दूँ ....
मेरे सपनों को नोचते
खरोचते हैं...
पर मैं इन्हें दुत्कार देती हूँ
सदा
क्या खबर
इन सवालों और जवाबों में
खो जाए मेरा वजूद ही....
और मैं रह जाऊं फिर ...अकेली!

Saturday, January 21, 2012

किरण

खिलखिलाओ मन
सृजन का बीज बोया
आज मैनें

हो रही पुलकित किरण ये
मुझ से मिलने आ रही
बादलों की ओट चंचल
प्रिय सी शरमा रही
गुनगुनाओ मन
जगाया भाग्य सोया
आज मैनें

खेत में बिखरी हुई जो
फसल पर इठ्ला रही
सिन्दूरी यह लालीमा
ठिठुरी धरा को भा रही
बहलजाओ मन
है पाया था जो खोया
आज मैनें

नींद से जागी अभी
नव कोपलें अलसा रही
ऋणी हो कोयल कहीं
नवगीत कोइ गा रही
ठहर जाओ मन
धरा पर सुख संजोया
आज मैनें..........

Friday, January 6, 2012

ऊर्जा का स्रोत तुम .....

ऊर्जा का स्रोत तुम
दर्प का हूँ भार मैं

विशाल तुम ह्रदय लिए
सूर्य भांति तप रहे
दूसरों के ही लिए
निःस्वार्थ जीवन जप रहे
क्षमा की एक जोत तुम
त्रुटियों का संसार मैं
ऊर्जा का स्रोत तुम ....

अश्रुओं को सोक लूँ
उम्र ढलती रोक लूँ
बिन तुम्हारे ओ पिता
कैसे जीवन सोच लूँ
सत्य ओत प्रोत तुम
झूठा अहंकार मैं
ऊर्जा का स्रोत तुम...

सूर्य जैसे है सदा
धूप छाँव से बंधा
स्वर्ण सी आभा लिए
तुम दमकना सर्वदा
ज्ञान का उद्योत तुम
विराट अंधकार मैं
ऊर्जा का स्रोत तुम ....
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