शब्द मेरा उत्साह ... छंद मेरी वेदना , जीवन मरण ये असाध्य दुःख , केवल कविता ही आत्म सुख !!!
Wednesday, July 27, 2011
नई बात होती है ...!
Tuesday, July 26, 2011
समंदर तू मुझे अपनी यही गहराइयाँ देदे,
तेरी मोजों की ये सिलवट यही उचाइयां देदे
मुझे अपनी यही आदत यही तन्हाइयां देदे
पर ये क्या की बदले में मुझे रुस्वाइयां देदे
लबों के ज़र्द होने तक, कुछ, नई रुबाइयां देदे
Sunday, July 24, 2011
गया कोई
कर के वादा निभा गया कोई
हाए !मुझको भुला गया कोई
है जो काली ये रात क्या कीजे
जलता शोला बुझा गया कोई
कोई होगा न बुरा उस सा यहाँ
मुझ को मुझ से चुरा गया कोई
मंजिलें ग़ुम सफ़र लम्बा है
नक़्शे-पा ही मिटा गया कोई
उन बारिशों की ख़बर किस से लें
जिन से मुझ को भीगा गया कोई
कितना बैचन आज फिर दिल है
रो के , मुझ को रुला गया कोई
Monday, July 4, 2011
Thursday, May 19, 2011
Wednesday, April 13, 2011

किसी आवाज़ का मोहताज ना हो जाए तू,
है मुमकिन किसी को याद भी ना आए तू
सफ़र में होके मुसाफिर की तरह ही रहना,
क्या ज़रूरत किसी के दिल में उतर जाए तू
किया है उस से जो वादा तो निभा भी लेना,
दिल की बातों में आकर ना मुकर जाए तू.
बुरा नहीं यूँ बनाना नये रिश्ते लेकिन
अज़ल से हैं जो उन्हे ही निभा ना पाए तू
मरके बन जाना है गर्दिश का इक तारा लेकिन,
जीकर भी तो किसी घर का दिया जलाए तू
बदल रहा है ज़माना ज़रा तू भी तो बदल
क्यूँ बूढ़ी रस्म का हर वक़्त जशन मनाए तू

