Saturday, August 20, 2011

कृष्ण बनो तो...

तुम
अधरों पर धर मुरली
धुन नई छेड़ो
मैं
पुनः सब स्मृतियाँ छोड़
तुम्हारे चरणों में आजाऊं
पुलकित हो आऊं
प्रिय तुम ...
इस युग के कृष्ण बनो तो
मैं राधा बन जाऊं ......!

Wednesday, August 10, 2011

चुप

तुम कितना चुप रहती हो
जब चुप रहती हो क्या सोचती हो
या चुप्पी के लम्हो मे तुम कुछ
सोच भी पाती नहीं हो
या सोच के समन्दर मे खो कर
खुद को खोज ही पाती नहीं हो
और इसलिये शायद कुछ
बोल ही पाती नहीं हो……॥

Wednesday, August 3, 2011

मैं साधक ..




हा
मुझ को भी हो जाना है
साधक विलीन ...
स्वच्छंद ....निश्छल
स्वाधीन !
बंधन में बंधना
क्या हो जाना है
लक्ष्य विहीन
कैसे हो जाता कोई साधक
है स्वप्निल जीवन अर्थहीन ....
जो साधन पथ पर लेता
अपनों से
सुख छीन... !
हा
मैं तो हूँ साधक,
नहीं मुझ में भावना... हीन
कर्त्तव्य मार्ग के रश्मि रथ पर हूँ आसीन .....
मैं साधक विलीन !

Wednesday, July 27, 2011

नई बात होती है ...!

जब कभी रात होती है
कुछ नई बात होती है

अँधेरा भी सुकून देता
जो मुलाक़ात होती है

दरिंदों की नहीं ग़लती
ये उनकी ज़ात होती है

कोई जो होंसला रखले
उसकी कायनात होती है

नहीं है फ़र्क इन में भी
ये शे येही मात होती है

बिछडेंगे ये सोचें क्यूँ
ये भी कोई बात होती है

कभी हँसना कभी आंसू
अजब हयात होती है

सभी से फ़ासला रक्खें
दोस्ती खैरात होती है

खो जाए तो दूंढ़े कौन
गज़ल सौगात होती है



Tuesday, July 26, 2011


समंदर तू मुझे अपनी यही गहराइयाँ देदे,
तेरी मोजों की ये सिलवट यही उचाइयां देदे


बदल जाएगा हर मौसम मगर तू है वही
मुझे अपनी यही आदत यही तन्हाइयां देदे


किसी मंज़र के गुम होने का ग़म नहीं मुझको
पर ये क्या की बदले में मुझे रुस्वाइयां देदे


कभी बेलौस मस्ती में कोई तो शाम निकले
लबों के ज़र्द होने तक, कुछ, नई रुबाइयां देदे

Sunday, July 24, 2011

गया कोई

कर के वादा निभा गया कोई

हाए !मुझको भुला गया कोई


है जो काली ये रात क्या कीजे

जलता शोला बुझा गया कोई


कोई होगा न बुरा उस सा यहाँ

मुझ को मुझ से चुरा गया कोई


मंजिलें ग़ुम सफ़र लम्बा है

नक़्शे-पा ही मिटा गया कोई


उन बारिशों की ख़बर किस से लें

जिन से मुझ को भीगा गया कोई


कितना बैचन आज फिर दिल है

रो के , मुझ को रुला गया कोई


Monday, July 4, 2011

सत्य भी तो निरपेक्ष नहीं,
अटल.... अमर
कभी नहीं
इस को करे परिभाषित कौन ?
इसे स्वीकारे बस एक मौन!
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