Friday, November 26, 2010

चंद सांसें

चंद सांसें लम्बी बातें,
राह तकती ,सूनी आंखें।
एक सपना साथ रहना
याद करना ,जब भी थकना।

यह कहानी है पुरानी,
करती निंदिया आनाकानी।
ख़ौफ़-ए-रुस्वाई शब-ए-तन्हाई
है मगर झूठी लडाई,।

जब भी मिलना ऐसे मिलना,
खूब हंसना ,और खिलना।

5 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत सुन्दर!

sada said...

बेहतरीन शब्‍द रचे हैं ....।

M VERMA said...

सुन्दर भाव

संजय भास्कर said...

truly brilliant..
keep writing..all the best

nutan said...

thank you

www.hamarivani.com